Categories
new

This is my first post 

Hello, this is my first post and I joined it to improve my writing skills and become a good writer. I hope you all help me too.

post

Categories
Motivational poetry

नारी डर की सूरत नही….

नारी डर की सूरत नही,
सम्मान का जो पाठ पढ़ाये,
वैसी वो एक गुरु है।
कर्तव्ये से न भटको कभी,
ऐसा स्त्रियों ने सिखाया है।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

स्त्री एक पहचान

स्त्री एक पहचान,
उसे शक्ति का वरदान है,
वो खुद में ही महान है,
विश्वाश का सूत्र है,
वो रिश्तों का डोर है,
कमज़ोर का सहारा,
समझदारी की मूरत है।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational Musings poetry

ये आसमाँ अकेला

ये आसमाँ अकेला,
सूरज अकेला है,
चाँद अकेला है,
दुनिया में हर कुछ एकलौता है,
बस जी रहे उम्मीद में,
की उनके पास काम है,
नही तो बिन काज,
लगते दुनिया से बेकार हैं।

– मनीषा कुमारी

Categories
Musings poetry

तारीफ के मोहताज़

तारीफ के मोहताज वो कुछ इस तरह हुए,
हमे देखने के लिए वो कुछ बे वक्त से हुए।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational Musings story

वाह! कम होती दुनिया बहोत है..

वाह! कम होती दुनिया बहोत है,
लोग कहते जीवन में,
मिठास थोड़ी कम है।
थोड़ी सी परेशानी से,
दुनिया बदल जाती है।
खुद को बदलने से,
वो कुछ बदल जाते हैं।
कुछ कहने से अच्छा,
लोग कहते हैं,
वाह! कम होती दुनिया बहोत है।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational Musings poetry

कलम मुझे जानती है

कभी कलम मुझे लिखती है,
कभी मैं कलम से लिखती हूँ।
हर बात जानती वो भी है,
हर बात जानती मैं भी हूँ।
दुनिया की हर खुशी कम है,
उसके सामने,
जब सामने कागज़,
और हाँथ में कलम हो।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

उसे जानना मुश्किल था

उसे जानना मुश्किल था,
उसे पहचानना मुश्किल था।
जिंदगी एक पहेली निकली,
उसे सुलझना मुश्किल था।
वक्त के रहते कुछ भी न मुश्किल था,
लेकिन वक्त पे चलना मुश्किल था।
वक्त के कँटीले रास्तों पर चल कर,
जिंदगी को जानना मुश्किल था।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational Musings poetry

विशेष क्षण

विशेष क्षण तो हर दिन हर पल होता है,
क्योंकि हर पल कमाल होता है,
हर विषय पे लिखना खास होता है,
बातों में भले कम हैं,
लेकिन लिखना कुछ खास होता है,
इसलिए हर क्षण हमारे लिए खास होता है।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational Musings poetry

मुश्किलें

वो देखो क्या आ रहा,
ये तो मुश्किलों पहाड़ चल रहा।
बचो छिपो न पास इसके,
कहीं तुम्हे आंधी में उड़ा न ले जाय।
लेकिन ये केस शोर है,
रोता कोई जोर से,
मुश्किलें आँसू बहाती,
रोती है जोर से,
की माँगता खुद मुझे,
खुद ही मुझसे छिप रहा।

– मनीषा कुमारी

Categories
microtale Motivational poetry

कटपुतली है वो इंसान

कटपुतली है वो इंसान,

जो दूसरों को देखकर,

अपनी मंजिल बदल दिया करते हैं।

असली इंसान तो वो है,

जिसने खुद से ही मंजिल बनाई है,

खुद से ही अपनी पहचान बनाई है।

न बदला है न बदलेगा,

भले कुछ ठेस से वो पिघला है,

लेकिन अपने हुनर को न कभी बदलेगा।

– मनीषा कुमारी